बवासीर का लक्षण, कारण और इलाज | Piles meaning in hindi.

बवासीर का लक्षण, कारण और इलाज | Piles meaning in hindi. 

नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग में दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं “Piles meaning in hindi ” अर्थात बवासीर क्या होता है और बवासीर क्यों होता है. बवासीर से जुड़ी और भी कई प्रकार की जानकारी आज के इस पोस्ट में मिलेगा. साथ ही पोस्ट के अंत में बवासीर को जड़ से खत्म करने का घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय को बताया गया है. इसलिए आशा करता हूं कि आप इस पोस्ट को ध्यान से पढ़ेगें. 

बवासीर का लक्षण, कारण और इलाज | Piles meaning in hindi.
Piles meaning in hindi. 

    बवासीर क्या होता है? (What is Piles meaning in hindi). 

    Piles को बाबासीर या Hemorrhoids भी कहा जाता है। बवासीर एक आम बीमारी है , जो पुरूष और महिला में लगभग बराबर होती है। Science के अनुसार लगभग 50 की उम्र के बाद 50% लोगो को piles होता है. 

    इसमें गुदा (Anus) के अंदर और बाहर तथा मलाशय (Rectum) के निचले हिस्से में सूजन हो जाती है। जिसकी वजह से गुदा के अन्दर और बाहर मस्से(lumbs) बन जाते हैं। इन मस्सों की वजह से मल त्याग करते समय असहनीय दर्द और पीड़ा होती है और इससे रक्त भी निकलता है. यदि समय पर इसका इलाज नहीं किया गया तो इससे  ulcer हो सकता है.

    कई लोग कहतें हैं कि यह एक अनुवांशिक समस्या भी है,परन्तु हम विज्ञान की  दृष्टिकोण से देखे तो ऐसा नहीं है. हाँ  अधिकांशत: लोगों में बाबासीर होता है। बाबासीर के बहुत पुराना होने पर यह भगन्दर का रूप धारण कर लेता है जिसे फिस्टुला (Fistula) भी कहते हैं। इसमें असहानीय जलन एवं पीड़ा होती है।

     

    बवासीर कितने तरह का होता है? 

    बवासीर दो तरह का होता है. 

    Internal बाबासीर या खूनी बवासीर –

    Internal बवासीर को खूनी बवासीर भी कहा जाता है, क्योंकि इस तरह के बाबासीर में खून आता है. 

    खूनी बवासीर में कोई पीड़ा नहीं होती है परन्तु इसमें तरह के बाबासीर में मल त्याग करते समय खून आता है। इसमें rectum के अन्दर मस्से हो जाते हैं और जब हम मल त्याग करते हैं तो मल के साथ थोड़ा-थोड़ा खून टपकता ह.कई बार खून ज्यादा या पिचकारी के रूप में आने लगता है.

    External बाबासीर या बादी बवासीर-

    बादी बवासीर से ग्रसित लोगों में पेट की समस्या अधिक रहती है और उन्हें कब्ज एवं गैस की समस्या भी बनी ही रहती है। ऐसा देखा गया है कि बादी बाबासीर के मस्सों से रक्तस्राव नहीं होता है।इस तरह के मस्से बाहर आसानी से देखे जा सकते हैं। इन मस्सों में बार-बार खुजली एवं जलन होती है। शुरुआती दिनों में यह तकलीफ नहीं देते, लेकिन लगातार खराब खान-पान और कब्ज रहने से यह फूल जाते हैं। जिस कारण इनमें खून जमा हो जाता है, और सूजन हो जाती है।

    इस सूजन में भी असहनीय पीड़ा होती है, और रोगी दर्द से छटपटाने लगता है। यह ज्यादे तकलीफदेह होती है क्यों कि यह बाहरी भाग में रहता है. जिस कारण हमेशा सचेत रहना होता है ताकि कही से चोट न लग जाए. रोगी में यह मलत्याग करते समय, और उसके बाद भी  दर्द बना रहता है।

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    Note -बाबासीर को ठीक करने के लिए कई घरेलू नुस्खे और इलाज करने से यह आसानी से ठीक हो जाता है. परन्तु ध्यान रहे कि बाबासीर होने के बाद ज्यादा समय ना हुआ हो, नहीं तो कई बार इसे surgery करके ठीक होता है. 

    बवासीर क्यों होता है, इसके क्या कारण हैं?

    बवासीर होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे कि इनमें सबसे प्रमुख है, कब्ज का होना.कब्ज होने के कारण कई बार मल त्याग नही होता है और यदि होता भी है तो अधिक जोड़ लगाना परता है.जिस कारण गुदा की परत हटने लगती है और धीरे -धीरे रक्त आने लगता है और सूजन होती है.बवासीर होने के और भी कई कारण हैं जैसे कि –

    1. अधिक तला एवं मिर्च-मसालेदार भोजन करना
    2. शौच ठीक से ना होना यानि कब्जीयत रहना. 
    3. अपने भोजन में फाइबर युक्त पदार्थ का सेवन ना करना. 
    4. असंतुलित जीवन शैली होना 
    5. धूम्रपान और शराब का सेवन
    6. ज्यादे समय तक शोच में बैठे रहने से. 

    बवासीर होने के लक्षण (Piles symptoms in Hindi) –

    आमतौर पर बवासीर के शुरूआती दिनों में लक्षण का पता नहीं चलता.बवासीर होने के लक्षण तब तक नहीं दिखता है जब तक कि यह थोड़ा तकलीफदेह और ज्यादे समय  से ना हो. बवासीर होने के कई लक्षण दिखाई दे सकते हैं. जैसे कि –

    1. गुदा के आस-पास गांठ और दर्द जैसा महशूश होना.
    2. मल त्याग करने में ज्यादा जोर लगाना. 
    3. शौच करने के बाद भी पेट साफ हेने का आभास नहीं होना.
    4. बार-बार शोच जाने की इच्छा होना. 
    5. मल त्याग करते वक्त जलन के साथ खून का आना
    6. शौच करते समय अत्यधिक पीड़ा होना
    7. गुदा के आस-पास खुजली होना , लालीपन और सूजन 

    यदि आपको इस प्रकार के लक्षण दिखाई दे रहे हैं या हो रहा है तो आप अपने डॉक्टर से संपर्क जरूर करें और इसका सही समय पर ईलाज जरूर कराए. 

    बवासीर का ईलाज कैसे करें? 

    यदि बवासीर शुरूआती अवस्था में हो तो इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है परन्तु यदि यह भयंकर हो जाए तो इसका एक मात्र ईलाज होता है, सर्जरी. बवासीर का सर्जरी कराने से यह आसानी से ठिक हो जाता है. परन्तु यदि आप अपने जीवनशैली को ठीक नहीं करते हैं तो यह दोबारा भी हो सकता है. इसलिए चलिए जानतें हैं कैसा होना चाहिए जीवनशैली-

    बवासीर में जीवनशैली कैसा होना चाहिए –

    बवासीर में हमें एक संतुलित और व्यवस्थित जीवनशैली का पालन करना चाहिए. जैसे कि –

    • Regular excercise करना चाहिए. 
    • Healthy food और फाइबर युक्त भोजन करना चाहिए. 
    • ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए. 
    • ज्यादे समय तक एक स्थान पर नहीं बैठना चाहिए. 
    • ज्यादा मसालेदार और चटपटे भोजन ना करें. 
    • अपने हेल्दी दिनचर्या का पालन करें. 

    बवासीर को ठीक करने का उपाय –

    बवासीर को ठीक करने के लिए कई तरह के घरेलू और आर्युवेदिक उपायों को अपना सकतें हैं. जैसे कि –

    दूघ से करे बवासीर का उपचार – बवासीर के रोगीयों के लिए यह एक अद्भुत उपचार है,इसके लिए ठंडे या हल्का गर्म दूध में नीम्बू के रस को निचोरकर, तुरंत पी लें. ऐसा करने से 5-7 दिनों के अंदर बवासीर ठीक हो जाता है. यह बाबा रामदेव द्वारा, हजारों रोगीयों पर अपनाया गया उपाय है. 

    Aloe Vera – बवासीर में एलोवेरा जैल और एलोवेरा जूस दोनो ही काफी फायदेमंद होता है. Aloe Vera जूस को सुबह -सुबह खाली पेट पीने से फायदा होता है. साथ ही बवासीर के जलन और दर्द में Aloe Vera जैल को लगा सकते हैं.

    कैले से – बवासीर को ठीक करने के लिए केले का उपयोग किया जाता है, इसके लिए एक केले को काटकर उसमें ,एक छोटा सा देशी कपूर डालकर निगल लें. इसे चबाना नहीं है.ऐसा करने से बवासीर में लाभ मिलता है.

    लौकी का जूस – यदि आपके पास लौकी है तो यह भी बवासीर के लिए बहुत लाभकारी होता है. इसके लिए बस लौकी का जूस बनाकर, उसे खाली पेट पीए.  तरह से बवासीर ठीक होने लगता है. 

    नारियल के लच्छे – नारियल की रेशेदार लच्छे को जलाकर, इसे दही या मट्ठे के साथ खाने से, बवासीर में लाभ होता है. 

    इसके अलावा 50 ग्राम अजवाईन, 50 ग्राम काला जीरा और 50 ग्राम नमक को कूटकर उसका चूर्ण बना लें. इसे सुबह -सुबह शोच के बाद ,1-2 चुटकी चूर्ण के साथ पीने से बवासीर के रोगीयों को काफी राहत मिलता है. 

    Last word –

    दोस्तों यदि आपको यह पोस्ट “Piles meaning in hindi ” से थोड़ी सी भी जानकारी मिली हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें ताकि उन्हें भी इसके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो.साथ ही आप अपना कमेंट जरूर करें.. धन्यवाद.. 

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